बसंत पंचमी : विशेष पूजा से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

वंसत पंचमी पर छोटे बच्चों को अक्षर अभ्यास करवाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। इस दिन माता-पिता अपने बच्चों को गोद में चांदी या अनार की कलम से शहद से बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ऊँ लिखे। इसके बाद सरस्वती का पूजन करें।
JiPanditJi
Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on linkedin
Share on email
Share on print
Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on whatsapp

बसंत पचंमी तिथि 

बसंत पचंमी प्रारंभ – सुबह 10:45 बजे 29 जनवरी, 2020
बसंत पचंमी समाप्त – दोपहर 01:19 बजे 30 जनवरी, 2020

बसंत पचंमी पूजा मुहूर्त-
29 जनवरी 2020 को 10:45 AM से 12:52 PM तक

बसंत पंचमी के दिन सिद्धि और सर्वार्थसद्धि योग जैसे दो शुभ मुहूर्त का संयोग बन रहा है। इस कारण पंडितों ने इसे वाग्दान, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना है।

ज्योतिषविदों का मानना है कि गुरुवार को वसंत-पंचमी मनाना श्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत होगा।

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विद्यार्थियों को बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है। बसंत पंचमी के त्योहार पर लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले रंग के फूलों से मां सरस्वती की पूजा करते हैं। हालांकि पीले के साथ ही सफेद रंग का ही उतना ही महत्व है। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है।

इस वर्ष तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन उदयातिथि होने के कारण बसंत पंचमी 30 जनवरी को मनानी ही श्रेष्ठ रहेगी। पंचमी तिथि बुधवार सुबह 10.46 से शुरू होगी, जो गुरुवार दोपहर 1.20 तक रहेगी। दोनों दिन पूर्वाह्न व्यापिनी तिथि रहेगी।

शास्त्रोक्त दृष्टि से वसंत पंचमी का पूजन सूर्योदय के समय प्रात:काल में ही किया जाता है, इसलिए जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित होती है, उसी दिन वसंत पंचमी का महत्व होता है। 29 जनवरी को पंचमी तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित नहीं होगी, बल्कि मध्याह्न पौने ग्यारह बजे शुरू होगी, जबकि 30 जनवरी को सूर्योदय के समय से ही पंचमी तिथि उपस्थित रहेगी, इसलिए 30 जनवरी को वसंत-पंचमी मान्य और शास्त्र सम्मत होगा।

इस बार तीन ग्रह खुद की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है।

इसलिए मनाई जाती है वसंत पंचमी

भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है, इसलिए यह ऋतु परिवर्तन का दिन भी है। इस दिन से प्राकृतिक सौन्दर्य निखरना शुरू हो जाता है। वसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है।

बसंत पचंमी कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी।

इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती।

मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।

बसंत पंचमी को क्या करें

बसंत पंचमी के दिन सुबह उठकर नित्यक्रम से निवृत्त होकर कलश (घट) स्थापित कर उसपर सरस्वती विग्रह स्थापित करें।

उसके पास मां सरस्वती का आह्वान करें और ”ऊं सरस्वत्य नम:” मंत्र का जाप 108 बार जाप करें।

माना जाता है कि ऐसा करने से निश्चित रूप से विद्यार्थियों पर मां सरस्वती की विशेष कृपा होगी।

पूजा-अर्चना के समय मां सरस्वती को सफेद वस्तु जैसे दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल का लड्डू, सफेद चंदन सफेद फूल सफेद वस्त्र नारियल शादी चढ़ाएं, बाद में इसी प्रसाद को वितरित करें। जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई-लिखाई आदि में नहीं लगता है, उनके लिए यह बेहतर उपाय है।

बसंत पंचमी के दिन बच्चों से काले रंग की पट्टी व चाक का पूजन करवाएं। बहुत छोटे बच्चों से चावल से भरी थाली पर अंगुली से इस दिन 3 में से कोई एक अक्षर लिखवाएं।

इस दिन सरस्वती स्वरूपा कमल व पुस्तक का पूजन करना चाहिए। इसके बाद सरस्वती के मूल मंत्र ” श्री ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा “ से देवी का पूजन व स्मरण करें। इसके साथ ही जो लोग अपने बच्चे को उच्च शिक्षा में सफल होता देखना चाहते हैं, वे पंचमी वाले दिन बच्चे के हाथ से किसी ब्राह्मण को वेदशास्त्र का दान करवाएं।

बसंत पंचमी के दिन 6 माह तक के बच्चों को पहली बार अन्न चखाने की भी परंपरा निभाई जाती है। इसमें बच्चे को पहली बार अन्न खिलाया जाता है, जिसे अन्न प्राशन संस्कार कहा जाता है।

इस दिन दूध पीते बच्चे को नए कपड़े पहनाकर, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर और उस पर बच्चे को बैठाकर मां सरस्वती की आराधना करके चांदी के चम्मच से खीर खिलाएं। बच्चे को जीभ पर ऐं, श्री या ऊँ लिखे।

वंसत पंचमी पर छोटे बच्चों को अक्षर अभ्यास करवाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। इस दिन माता-पिता अपने बच्चों को गोद में चांदी या अनार की कलम से शहद से बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ऊँ लिखे। इसके बाद सरस्वती का पूजन करें।

JiPanditJi

JiPanditJi

Jipanditji is a divine online platform that provides easy access to religious ceremonies, Pooja, Remedy Rituals, and Temple Darshan across temples in India and round the Globe. We are one stop solution to fulfill your divine desire, be it Pooja Samagri, books, idols and many more available online at unbelievable rates

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Main Menu

Start your spiritual Journey with us

Password must be at least 7 characters long.
Password must be at least 7 characters long.